Bukhari Faraz
Collection of writings by Faraz Bukhari
निभा कर चले
हम रुसूमाते-ता’ल्लुक़, निभा कर चले ||
नाज़ कितनों के सर पर उठा कर चले !!
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बात करो हो
मनसूब कहीं फ़िरक़ा कहीं ज़ात करो हो !!
क्या ख़ूब बयाँ , ख़ूबी-ए-आयात करो हो !!
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