Bukhari Faraz
Collection of writings by Faraz Bukhari
करते हुए गुज़रा है फ़क़त हाए दिसम्बर
करते हुए गुज़रा है फ़क़त हाए दिसम्बर !
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पीता हूँ धो के मैं उसी वादा-शिकन के पाँव
पीता हूँ धो के मैं उसी वादा-शिकन के पाँव !
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दिल में किसी मुराद को मेहमाँ बनाएँगे
दिल में किसी मुराद को मेहमाँ बनाएँगे !
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अभी बज़्म में जाम कम चल रहे हैं
अभी बज़्म में जाम कम चल रहे हैं !
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पिनहाँ हक़ीक़तों पे नज़र जाना चाहिए
पिनहाँ हक़ीक़तों पे नज़र जाना चाहिए !!
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निभा कर चले
हम रुसूमाते-ता’ल्लुक़, निभा कर चले ||
नाज़ कितनों के सर पर उठा कर चले !!
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बात करो हो
मनसूब कहीं फ़िरक़ा कहीं ज़ात करो हो !!
क्या ख़ूब बयाँ , ख़ूबी-ए-आयात करो हो !!
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